יום שישי, 30 בינואר 2009

फिजा और चाँद

फिजा और चाँद का किस्सा बड़ी खबर है। लेकिन समझ नही आ रहा है की समाज कहाँ जा रहा है। पत्रकरों के भी अपने तर्क हैं। जबरन मेहमान बन्ने की आदत है।नौकरी करनी है तौ कुछ भी करना होगा। फिजा जैसे किरदार तौ हर गली मे जाएँगी। चंद्रमोहन जैसे लोग हर जगह कुत्तागीरी करते दिख जायेंगे। पत्रकरों को अपनी आबरू ख़ुद ही dekhnee है॥

יום ראשון, 19 באוקטובר 2008

भारत देश कहाँ जा रहा है। शायद कहीं न जा रहा हो। लेकिन हालात ठीक नही हैं। राजनेता कितने कमीने हो गए हैं, इसका अंदाजा लगाना किसी के वश मे नही है। यदि किसी के वश मे है तो सिर्फ़ नेताओं के। नेताओं को गाली देना नया नही है। जबसे देश आजाद हुआ तब से नेता गाली खा रहे हैं। आगे भी खाते रहेंगे। गाली खाना नेताओं की आदत पड़ गई है। अब तो गाली नेताओं को समझ ही नही आती। असल मे देश को नेताओं ने रखैल बना रखा है। जब मर्जी होती है हमबिस्तर होते हैं। स्वाद अच्छा नही लगा तो दलालों की बाजार मे फेंक दिया। ऐसे मे ताजुब की बात यह है की लोगों की सोच भी बदल गई है। आम जनता भी अब यह कहने लगी है की देश ऐसे ही चलेगा।

हो सकता है की देश ऐसे ही चलता रहे। लेकिन इस तरह से चलते रहने से फायदा क्या है। हर जगह दंगे भड़क रहे है। लूटमार हो रही है। माँ बेटी को मार रही है। बेटा बाप का गला रेत रहा है। बाप अपनी ही बेटी से बलात्कार कर रहा है। फ़िर भी कुछ लोगों को लगता है की सबकुछ ठीक है। यह बात नेता कहें तो कोई बात नही। लेकिन, आम लोग कहेंगे तो देश भगवान् ही मालिक है।

יום רביעי, 23 ביולי 2008

सरकार जीत गई
संप्रग सरकार जीत गई। सोनिया गाँधी जीत गईं। मनमोहन सिंह भी जीत गए। हार किसकी हुई? शायद आम जनता की। हार मायावती की भी हुई है। मायावती जी मानें या न मानें। हार उनकी सबसे बडी है। जो सपना उनोहोने लेफ्ट की आंखों से देखा वह चूर चूर हो गया। अब सबके सुर बदल गए हैं। प्रकाश कारत अब मायावती का नाम नही ले रहे हैं। नायडू साहब पूछ रहे हैं की कौन मायावती? खुश हैं मुलायम सिंह यादव। अमर सिंह। साथ मे राजा भइया भी। इस तिकड़ी को मायावती ने सबसे ज्यादा परेशान किया है। तीनों को मौके का इंतजार था। लेकिन, प्रमोद तिवारी का क्या होगा? सपा का कांग्रेस से गठबंधन हुआ तौ प्रमोद की आँखें राजा भइया से कैसे मिलेंगी? लेकिन यह भारत की राजनीती है। यहाँ सबकुछ सम्भव है।

יום שישי, 11 ביולי 2008

आख़िर अरुशी की मौत के बारे मे कुछ बातें सामने आयीं।
लेकिन यह नही कह सकते की सिबिअई जो कह रही है वह सच है।
फ़िर भी तलवार राहत की साँस ले सकते सिबिअई भी वही करती है जो
पुलिस करती है। भंग कुएं मे ही है।

יום רביעי, 4 ביוני 2008

क्रिकेट मे पैसा है। कहने का मतलब ये है की नाम भी खूब । दाम भी खूब ।
ऐसे मे खिलाड़ी अपने को अलग समझने लगते हैं । अलग दिखने की कोशिश
करने लगते हैं । बात आगे बढ़ती है । शान बघारने के चक्कर मे ऐसी चीजों
को हाथ लगा बैठते हैं जो आमतोर पर गैर कानूनी होती हैं । पाकिस्तान आशिफ
के साथ यही हुआ ।

יום שלישי, 3 ביוני 2008

ipl

आइपीअल मे बालाओं ने कहर बरपाया लोग खुश हुए ।
अब बालाएं खेल का हिस्सा बन जाएँगी । ऐसे मे खेलों का क्या होगा ।
कुछ लोग कह सकते हैं की खेल मर जाएगा । लेकिन खेलों के दर्दिओं को शायद
डरने की जरूरत नही है .क्योंकि हुस्न का जादू कुछ देर का होता है .हुस्न सिर्फ़
सनसनी पैदा कर सकता है। दिल पर राज तो हुनर ही करता है .

יום שני, 2 ביוני 2008

maya

मायावती दुनिया को कदमो मे झुकाना शान समझती हैं। अच्छी बात है। आख़िर वे प्रदेश की मुखिया हैं। मुखिया होने के नाते कुछ भी कर सकती हैं। ख़ुद की प्रतिमा का अनावरण मायावती ही कर सकती हैं। जनता तो बेचारी है। बेकारी की मारी है। गरीबी की दुलारी है। अब तो अमीरी के बरे मे सोचती भी नही। आत्म स्वाभिमान के नाम पर मर रही है। मरती माया के पहले भी थी। मर अब भी रही है। अन्तर यह है की मरने का अफ़सोस नही है।