יום ראשון, 19 באוקטובר 2008

भारत देश कहाँ जा रहा है। शायद कहीं न जा रहा हो। लेकिन हालात ठीक नही हैं। राजनेता कितने कमीने हो गए हैं, इसका अंदाजा लगाना किसी के वश मे नही है। यदि किसी के वश मे है तो सिर्फ़ नेताओं के। नेताओं को गाली देना नया नही है। जबसे देश आजाद हुआ तब से नेता गाली खा रहे हैं। आगे भी खाते रहेंगे। गाली खाना नेताओं की आदत पड़ गई है। अब तो गाली नेताओं को समझ ही नही आती। असल मे देश को नेताओं ने रखैल बना रखा है। जब मर्जी होती है हमबिस्तर होते हैं। स्वाद अच्छा नही लगा तो दलालों की बाजार मे फेंक दिया। ऐसे मे ताजुब की बात यह है की लोगों की सोच भी बदल गई है। आम जनता भी अब यह कहने लगी है की देश ऐसे ही चलेगा।

हो सकता है की देश ऐसे ही चलता रहे। लेकिन इस तरह से चलते रहने से फायदा क्या है। हर जगह दंगे भड़क रहे है। लूटमार हो रही है। माँ बेटी को मार रही है। बेटा बाप का गला रेत रहा है। बाप अपनी ही बेटी से बलात्कार कर रहा है। फ़िर भी कुछ लोगों को लगता है की सबकुछ ठीक है। यह बात नेता कहें तो कोई बात नही। लेकिन, आम लोग कहेंगे तो देश भगवान् ही मालिक है।